हिजाब हटाने पर भड़का गुस्सा, बिहार के सीएम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन: बुरहानपुर में हुई नारेबाजी, नीतीश कुमार को हटाने की मांग तेज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर का हिजाब कथित तौर पर हटाने के विरोध में बुरहानपुर में कांग्रेस नेताओं और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह घटना हाल ही में पटना में आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने इस कृत्य को महिला के सार्वजनिक अपमान के साथ-साथ मुस्लिम विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से तत्काल हटाने की मांग की है।

यह प्रदर्शन बुधवार की शाम को बुरहानपुर शहर में किया गया। बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक नेता और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर बुरहानपुर के एसडीएम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम अजमेरसिंह गौड़ को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। एसडीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शन के दौरान शहर में तनाव का माहौल था, लेकिन पुलिस की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रण में रही।

Screengrab of the video share by the RJD on X. (Photo/@RJDforIndia)


प्रदर्शन का आयोजन मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी के स्थानीय अल्पसंख्यक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किया था। इनमें जिला कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक कांग्रेस विभाग और वार्ड पार्षदों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रदर्शन में कांग्रेस अल्पसंख्यक नेता फरीद काजी, शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रिंकू टाक, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के सलीम कॉटनवाला और निखिल खंडेलवाल सहित कई पार्षद और स्थानीय कार्यकर्ता शामिल थे। फरीद काजी ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मुस्लिम महिला का नहीं, बल्कि सभी महिलाओं का अपमान था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से नीतीश कुमार ने अपनी मुस्लिम विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है।

विरोध प्रदर्शन का मूल कारण 15 दिसंबर को पटना में हुई एक घटना है। पटना में आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिजाब पहनकर आई एक अल्पसंख्यक डॉक्टर को नियुक्ति पत्र देते समय कथित तौर पर उसका हिजाब हटा दिया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे देश भर में अल्पसंख्यक समुदाय में आक्रोश फैल गया। इस कृत्य को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सम्मान के खिलाफ माना गया। बुरहानपुर के प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को “बेहद शर्मनाक” और “असंवेदनशील” बताया। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह का व्यवहार करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

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